
नारायणपुर:- ना कोई सरकारी आदेशपत्र ना कोई शासकीय प्रतिबंध फिर भी पेट्रोल पंपों में अपनी मनमर्जी से मनमानी आदेश निकाला जा रहा है मानो प्रशासन पेट्रोल पंप वाले ही बन बैठे है ।नारायणपुर के सभी पेट्रोल पंपों का यही तुगलगी फरमान है की डब्बे में डीजल नहीं दिया जाएगा जबकि प्रशासन का साफ कहना है की 20 लीटर तक की डीजल डब्बे में दिया जाए ताकि दूर दराज से आने वाले किसान भाइयों और दूर दराज में निर्माण कार्यों में कोई बाधा उत्पन्न ना हो।
लेकिन इसके उलट बंगलापारा स्थिति श्याम सुंदर पेट्रोल पंप संचालक द्वारा डब्बे में डीजल देने को साफ मना किया गया जब स्थिति पूछी गई क्या कोई आदेश जिला प्रशासन से जारी हुआ है ? तो श्याम सुंदर पेट्रोल पंप संचालक का कहना था कोई आदेश जिला प्रशासन से नहीं मिला है बस हम पेट्रोल पंप वालो का यह निर्णय है अगर श्याम सुंदर पेट्रोल पंप संचालक का यह कहना सही है की सभी पेट्रोल पंप संचालक द्वारा डब्बे में डीजल नहीं देने का फैसला लिया गया है तो फिर जिला प्रशासन के आदेश को ठेंगा पेट्रोल पंप संचालको द्वारा दिखाया जा रहा है जो यह आदेश पारित किए थे की किसान परिचय पत्र दिखा कर तथा बीस लीटर सामान्य तौर पर डब्बे में डीजल दिया जाय।
नारायणपुर जिला प्रशासन द्वारा भी यह निर्णय इस लिए लिया गया की जिला प्रशासन नारायणपुर जिले के भौगोलिक स्थिति से भली भांति परिचित है और जानती है की खेती किसानी का समय है और दूर अंचलों में सरकारी निर्माण कार्य भी चालू है जिला प्रशासन के बीस लीटर डीजल डब्बे में देने के आदेश से कोई परेशानी उत्पन्न अभी तक नारायणपुर जिले वासियों को नहीं हुई थी लेकिन यह भी देखा जा रहा है अन्य जिले जो नारायणपुर से लगे हुए है जैसे कोंडागांव और कांकेर वहां डिब्बे में डीजल नहीं देने की वजह से तनाव ,मारपीट,और धरना प्रदर्शन की नौबत आन पड़ी थी।यह नाराजगी खास कर किसान और ठेकेदार वर्गों में ज्यादा देखने को मिल रहा है।यह भी देखने को मिला है कुछ नारायणपुर के पेट्रोल पंप संचालक अपने चहेतो को सरकारी रिजर्व कोटा से पेट्रोल ,डीजल देते है और अपना मधुर संबंध बनाए रखते है
पेट्रोल पंप संचालकों को भी यह समझना चाहिए नारायणपुर जिले की भौगोलिक स्थिति विषम परिस्थिति से भरी पड़ी है तथा जिला प्रशासन नारायणपुर को भी पेट्रोल पंपों के संचालक की इस मनमानी रवैये में संज्ञान ले कार्यवाही करनी चाहिए।प्रदेश में भाजपा की सरकार है पेट्रोल पंपों के तुगलगी फरमान से सरकार की भी किरकरी होना स्वाभाविक है जबकि इन सभी कारणों में ना तो भाजपा सरकार और ना ही जिला प्रशासन का कोई दोष है।




