अबूझमाड़ में सड़क के लिए ग्रामीणों का संघर्ष, 12 किमी सड़क खुद बना रहे 45 लोग
नारायणपुर:- जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र से एक बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आई है, जहां विकास के अभाव में ग्रामीण खुद ही सड़क निर्माण के लिए उतर आए हैं। प्रशासन की अनदेखी से परेशान ग्रामीण अब श्रमदान कर 12 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने को मजबूर हैं
नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 75 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत धूरबेड़ा के आश्रित गांव कोड़तामडका के 40 से 45 ग्रामीणों ने कुतुल से कोड़तामडका तक सड़क निर्माण का बीड़ा उठाया है। फावड़ा और कुदाल लेकर ये ग्रामीण दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र को काटते हुए श्रमदान से सड़क बना रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन, सरपंच और सचिव से सड़क निर्माण की गुहार लगाई, लेकिन कहीं से भी कोई मदद नहीं मिली। मजबूरी में ग्रामीणों ने घोटुल में बैठक कर स्वयं श्रमदान से सड़क बनाने का निर्णय लिया।
अधूरा सपना – प्रधानमंत्री आवास योजना:
ग्रामीणों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें घर तो स्वीकृत हुए, लेकिन सड़क न होने के कारण निर्माण सामग्री गांव तक नहीं पहुंच पा रही है। ईंट, सीमेंट और गिट्टी के अभाव में कई लोगों के घर अधूरे पड़े हैं।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
अबूझमाड़ के ग्रामीण आज भी पगडंडियों के सहारे कई किलोमीटर दूर से राशन ढोने को मजबूर हैं। सड़क न होने से मरीजों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है और 108 एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी गांव तक नहीं पहुंच पातीं।
ग्रामीणों की पीड़ा
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने सड़क, पुल-पुलिया और अस्पताल जैसी सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ भी नजर नहीं आता। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे जेसीबी या मशीनों का खर्च भी नहीं उठा सकते।







