
नारायणपुर:- मोहर्रम का महीना मुस्लिम समाज में यादे शहीदाने करबलाओ के नाम से मनाया जाता है इस माह में इस्लाम और हक के खातिर कर्बला की लड़ाई लड़ी गई थी जिसमें हजरत ईमाम हुसैन के साथ उनके कई साथी ,रिश्तेदारों को कत्ल किया गया था लेकिन कर्बला के मैदान में मुस्लिमों ने शहीद होना चुना झूठ और गलत के सामने सर झुकाना नहीं ।हज़रत सैयद ईमाम हुसैन और उनके साथियों,रिश्तेदारों को यजीद की सेना द्वारा भूख,प्यास से तड़पाया गया था और कत्ल किया गया था मुस्लिम समाज द्वारा माहे मोहर्रम का जब भी महीना आता है विभिन्न प्रकार के आयोजन किया जाता है जिसमें कर्बला का वाक्या,खिचड़ा तक्सीम,रोजदारों के लिए रोज़ा अफ्तार और आम लंगर का एहतमाम किया जाता है।
जामा मस्जिद नारायणपुर में पेशे ईमाम द्वारा एक मोहर्रम से दस मोहर्रम तक कर्बला का वाक्या सुनाया गया वही यंग कमेटी के जानिब से जय स्तंभ चौक पर मोहर्रम के दसवीं तारीख को ही खिचड़ा और शर्बत का आयोजन किया गया जो की पिछले कई सालों साल से नारायणपुर मुस्लिम समाज करता आ रहा जो की आपसी भाईचारा और एकता का प्रतीक भी है जिसमें नारायणपुर वासी बढ़ चढ़ कर आते है और खिचड़ा और शर्बत का सेवन करते है,जिसे यंग मुस्लिम कमेटी ने अपनी पूरी जवाबदारी और जिम्मेदारी निभाते हुए बड़ी ही मेहनत से सफल आयोजन के रूप में खत्म किया मोहर्रम के ही दसवीं तारीख को मुस्लिम समाज द्वारा रोजा भी रखा जाता है जिसमें रोजा रखने वालों के लिए शाम अफ्तारी का एहतमाम पुरानी अंजुमन इस्लामिया कमेटी के जानिब से जमा मस्जिद नारायणपुर में किया गया जिसमें तमाम रोजदारों ने शिरकत फरमा कर पुरानी अंजुमन इस्लामिया कमेटी को इज़्ज़त अफ़ज़ाई और अपने दुवाओं से नवाजा।मोहर्रम के ही दसवीं तारीख को अंजुमन इस्लामिया कमेटी के जानिब से मुस्लिम समाज के लिए आम लंगर का आयोजन रखा गया है।
इस तरह नारायणपुर मुस्लिम कौम ने अपनी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए एक मोहर्रम से दस मोहर्रम तक के तमाम आयोजनों को सफलता पूर्वक किया।





