
नारायणपुर:- अबूझमाड़ क्षेत्र जो कभी अपने हरियाली और मनमोहकता के लिए जाना जाता था जो एक लंबे अंतराल से नक्सली दहशत देख चुका है जहां विकास कोसो दूर दूर तक नजर नहीं आता था लेकिन भाजपा सरकार के राज्य शासन में आते ही प्रण लिया गया की आदिवासी और अबूझमाड़ को अब नक्सली दहशत नहीं और नहीं देखना पड़ेगा और अबूझमाड़ को विकास से कोई नहीं ताकत रोक पाएगा इस प्रण स्वरूप ही राज्य शासन और जिला प्रशासन के जुगलबंदी के चलते आदिवासी अंचलों में सुदूर क्षेत्रों तक विकास हो रहा है।
लेकिन इसी विकास के पीछे ग्रामीणों की लालच भी वन भूमि को ले कर बड़ी है जहां आज सोनपुर रेंज में ग्रामीण वनों को काट कर, सुखा कर, जला कर जमीन हथियाने के होड में लगे है और सोनपुर रेंज वन अमला चुपचाप मुख दर्शक बन देख रहा है मानो वन विभाग के आदेश के चलते ही वन भूमियों पर अतिक्रमण किया जा रहा हो यह वन भूमि के अतिक्रमण का दृश्य नारायणपुर से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी से देखा जा सकता है आखिर क्या कारण है की वन विभाग जिसकी जिम्मेदारी है वह अपनी जवाबदारी तय नहीं कर पा रहा ? इस पर मुख्य वन मंडलाधिकारी को तत्काल निर्णय और कार्यवाही करने की आवश्यकता है।अन्यथा वह दिन दूर नहीं की वन की जगह सिर्फ अतिक्रमण के जरिए किया हुआ सिर्फ जमीन ही नजर आएगी । वैसे भी वन विभाग अपने ठेकेदारी के चलते ही सिर्फ पहचाना और जाना जा रहा है।जहां निर्माण की बात हो तो पूरे अधिकारी और अमला नजर आता है लेकिन वनों पर अतिक्रमण ग्रामीणों द्वारा जो किया जा रहा है वहां सिर्फ कार्यवाही ना कर चुप्पी या तो आंख मूंद लिया जा रहा है।



